Tuesday, 23/10/2018 | 4:29 UTC+5
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पत्रकार को बोर्ड परीक्षा देखना पड़ा महंगा ।

चंदौली से देवानंद यादव की रिपोर्ट –
पत्रकारों को बीजेपी के शासन में सहूलियत नही हैं । ये आज चंदौली जिले के सकलडीहा थाने में देखने को मिला ।ज्ञानशिखा टाइम्स के पत्रकार को बोर्ड की परीक्षा देखना जहमत हो गया ,जब भारतीय विद्या मंदिर के केंद्र ब्यवस्थापक ने उनको अंदर जाने के लिए रोका ।वही तैनात सिपाही ने पत्रकार का कॉलर पकड़कर बाहर निकलने लगा ।दूसरी तरफ पत्रकार कॉलर पर से हाथ हटाने के लिए कहा तभी सिपाही मारपीट करने लगा और फिर बाहर जाने का रास्ता बंद कर दिया ।

वही अजय त्रिपाठी दरोगा पहुँचकर ये जानते हुए की ये व्यक्ति पत्रकार हैं इस बात को अनदेखा करते हुए लाठी उठा लिया मारने के लिए तभी पहुँचे दरोगा प्रभुनाथ यादव ने पत्रकार का बचाव किया ।मामला यही शांत नही हुआ पत्रकार को बुलाकर थाने में बैठा लिया गया ।उसकी दोनों मोबाईल छोड़ ली गयी ।साथ ही थाने में बैठाने के बाद पुलिस वाले पत्रकार को उल्टा सीधा बोले जा रहे थे । एक तरफा सिपाही के तरफ से मुकदमा पंजीकृत कराया गया ।जब यह बात की जानकारी पत्रकारों को हुई तब जाकर सीओ और एसपी ने संज्ञान लेते हुए पत्रकार को मुचलके पर छोड़ दिया गया ।
जब सरकार नकल विहीन परीक्षा का दावा भर रही हैं तो क्यों पत्रकारों को पर्यवेक्षक रोक रहे हैं ।क्या पर्यवेक्षक सीसीटीवी के नीचे से नकल तो नही करा रहे ।

अंदर की बात हैं कि ज्ञानेंद्र को तड़के लेखनी से कुछ महीने में अच्छी ख्याति मिली थी कुछ पुलिस वालों और कुछ पत्रकारों को ये नागवार लग रहा था ।इसी बीच मौका मिलने पर पुलिस वालों ने अपनी खीझ निकाल ली ।

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